'SIR का विरोध करने वालों को फर्जी वोटर हटने का डर': यतनाल का कांग्रेस पर हमला

Prime News5 October 20262 min read0 viewsराजनीति
'SIR का विरोध करने वालों को फर्जी वोटर हटने का डर': यतनाल का कांग्रेस पर हमला

कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए BJP से निष्कासित विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है और आरोप लगाया है कि विपक्ष की उनके इस्तीफे की मांग "फर्जी वोटरों" को खोने के डर से उपजी है। हुबली में पत्रकारों से बात करते हुए यतनाल ने दावा किया कि मतदाता सूचियों का जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पूरे भारत में मतदाता सूचियों को साफ करने की एक अहम कवायद है।

मतदाता सूचियों की सफाई

यतनाल ने कहा कि SIR प्रक्रिया सक्रिय रूप से फर्जी प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें हटा रही है, जिनमें डुप्लीकेट वोटर, कई मतदान केंद्रों पर पंजीकृत लोग और मृत व्यक्ति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा के लिए पूरी पारदर्शिता से काम कर रहे हैं।

"मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने वाले कांग्रेस पार्टी के हैं," यतनाल ने कहा। उन्होंने आगे दावा किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया अवैध प्रविष्टियों को हटाने में अहम रही है और पश्चिम बंगाल में रोहिंग्याओं, बांग्लादेशियों और फर्जी वोटरों से जुड़े मामलों का हवाला दिया।

विजयपुरा का उदाहरण

SIR की प्रभावशीलता बताने के लिए BJP नेता ने विजयपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

  • SIR से पहले: लगभग 2.25 लाख मतदाता।
  • SIR के बाद: लगभग 2.10 लाख मतदाता।

यतनाल ने जोर देकर कहा कि मौजूदा 2.10 लाख मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव के आंकड़ों से मेल खाती है, जिसे उन्होंने सफाई प्रक्रिया के कारगर होने का सबूत बताया। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया मनमानी नहीं है और जिस मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, वह सत्यापन के लिए फॉर्म जमा कर सकता है। इन आपत्तियों की समीक्षा जिलाधिकारी या संबंधित चुनाव अधिकारी करते हैं और कारण बताते हैं।

'वोट चोरी' के आरोप

यह सियासी विवाद उन खबरों के बाद आया है जिनमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले दस महीनों में SIR और अन्य चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों पर कई आपत्तियां दर्ज की थीं।

यतनाल ने कांग्रेस नेतृत्व, खास तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने CEC को देश की "अमूल्य संपत्ति" बताया और कांग्रेस पर भारत में "वोट चोरी" की असली शुरुआत करने का आरोप लगाया।

ऐतिहासिक तुलना करते हुए यतनाल ने 1946-47 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरदार वल्लभभाई पटेल को जवाहरलाल नेहरू से अधिक समर्थन मिला था। "वोट चोरी मोदी जी ने नहीं की। वोट चोरी अटल बिहारी वाजपेयी या मोरारजी देसाई ने नहीं की। कांग्रेस वह पार्टी है जिसने भारत में वोट चोरी की शुरुआत की," उन्होंने कहा।

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