"संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंज़ूरी नहीं दी": नए वोटरों के नामांकन फॉर्म पर CJI

Prime News5 October 20263 min read0 viewsराजनीति
"संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंज़ूरी नहीं दी": नए वोटरों के नामांकन फॉर्म पर CJI

भारत के चुनावी परिदृश्य में हलचल मचाने वाले एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के नामांकन में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को कभी मंज़ूरी नहीं दी।

यह टिप्पणी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को एक बेहद अहम सुनवाई के दौरान की। अदालत का यह बयान कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों को न्यायिक समर्थन मिलने को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के पिछले दावे को सीधी चुनौती देता है।

"साफ कर दें": CJI ने जवाबदेही मांगी

अदालत कक्ष में तनाव तब बढ़ गया जब CJI सूर्यकांत ने मतदाता नामांकन फॉर्म से जुड़ी विसंगति पर बात की। पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे, ने अनधिकृत बदलावों के स्रोत की पहचान करने की इच्छा जताई।

"किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंज़ूरी नहीं दी है। यह साफ कर दें। जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि संशोधन किसने किया," CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की।

यह न्यायिक स्पष्टीकरण निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के उस प्रेस बयान के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 के साथ लगी घोषणा को बरकरार रखा है। अदालत का मौजूदा रुख चुनाव आयोग के दावों और वास्तविक न्यायिक रिकॉर्ड के बीच बड़े विरोधाभास की ओर इशारा करता है।

एकतरफा फैसलों के आरोप और सियासी घमासान

यह सुनवाई मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के निलंबन और उन पर मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका का हिस्सा थी। याचिका में आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कई अहम फैसले CEC ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा तरीके से लिए।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की कानूनी दलील इस बात पर केंद्रित थी कि ECI के फैसले कानूनन सर्वसम्मति से या बहुमत से होने चाहिए। सिंह ने तर्क दिया कि CEC की कथित एकतरफा कार्रवाइयां चुनावी लोकतंत्र के लिए बुनियादी खतरा हैं।

इस विवाद ने तीखी सियासी बहस छेड़ दी है:

  • कांग्रेस की प्रतिक्रिया: सांसद जयराम रमेश ने CEC पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि "Gen Z" मतदाताओं को बाहर रखने के लिए फॉर्म 6 में जानबूझकर बदलाव किया गया।
  • कर्नाटक के मंत्री की आलोचना: मंत्री प्रियांक खरगे ने अदालती कार्यवाही को गलत तरीके से पेश करने के लिए CEC की आलोचना की और सवाल उठाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, तो नागरिक किस पर भरोसा करें।
  • नागरिक समाज की चिंताएं: कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने कहा कि ECI ने कथित तौर पर न्यायिक मंज़ूरी का दावा करने वाली अपनी पिछली प्रेस रिलीज़ वापस ले ली है, जिससे संकेत मिलता है कि CEC को अब "बलि का बकरा" बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किए

हालांकि पीठ ने CEC को निलंबित करने के लिए तत्काल एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया—और चुनाव संचालन पर ऐसे कदम के व्यावहारिक प्रभाव पर सवाल उठाया—लेकिन उसने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने कहा कि मौजूदा आदेशों को रद्द करने वाला कोई भी फैसला लेने से पहले उसे प्रमाणित जानकारी की जांच करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कई अधिकारियों को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग
  • CEC ज्ञानेश कुमार
  • चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी
  • उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग
  • DG (IT) सीमा खन्ना

अदालत के अगले कदम रिकॉर्ड की जांच पर केंद्रित होंगे, ताकि यह तय किया जा सके कि मतदाता नामांकन फॉर्म में संशोधन को ठीक-ठीक किसने अधिकृत किया और क्या आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय के संवैधानिक दायित्व को दरकिनार किया गया।

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