शिवराज सिंह चौहान बोले, PMGSY ग्रामीण सड़कें गुणवत्तापूर्ण हों और समय पर बनें

Prime News5 October 20263 min read0 viewsभारत
शिवराज सिंह चौहान बोले, PMGSY ग्रामीण सड़कें गुणवत्तापूर्ण हों और समय पर बनें

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों और इंजीनियरों को कड़ी चेतावनी दी है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक राष्ट्रीय मंथन कार्यशाला को संबोधित करते हुए चौहान ने ज़ोर दिया कि योजना के अगले चरण में केवल नियमित निर्माण के बजाय "गुणवत्तापूर्ण कनेक्टिविटी" को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

गुणवत्ता और ठोस समाधान पर फोकस

देशभर से आए PMGSY सचिवों, मुख्य अभियंताओं और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए चौहान ने प्रतिभागियों से औपचारिकताओं से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर की व्यावहारिक चुनौतियों के नवोन्मेषी समाधान खोजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल सड़कें बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वे टिकाऊ हों और समुदाय के लिए प्रभावी ढंग से काम आएं।

महात्मा गांधी के दृष्टिकोण को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि गांवों के विकास के बिना भारत का समग्र विकास असंभव है। उन्होंने अपने बचपन का एक निजी किस्सा साझा किया, जब पढ़ाई के लिए भोपाल पहुंचने को उन्हें कीचड़ भरे रास्ते पर घोड़े से 13 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। उन्होंने खराब बुनियादी ढांचे की मानवीय कीमत पर ध्यान दिलाया और बताया कि सड़कों के अभाव में गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों और गर्भवती महिलाओं को खाट पर ढोकर ले जाना पड़ता था, जिससे रास्ते में अक्सर दुखद मौतें हो जाती थीं।

देरी और घटिया काम पर सख्त कार्रवाई

केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक देरी और खराब योजना पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने तत्काल सुधार के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया:

  • टेंडर में देरी: चौहान ने कहा कि परियोजना की मंज़ूरी और निर्माण शुरू होने के बीच 72 दिन की समयसीमा तय है, लेकिन कई राज्य इस नियम का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे राज्यों का पूरा रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया।
  • टेंडर-पूर्व योजना: बार-बार टेंडर रद्द होने या बोली न मिलने से बचने के लिए उन्होंने सक्रिय "टेंडर-पूर्व योजना" का आह्वान किया, ताकि सामग्री की बढ़ती लागत और अटकी परियोजनाओं से बचा जा सके।
  • मंज़ूरी में अड़चनें: उन्होंने वन और पर्यावरण मंज़ूरी को लेकर "चिट्ठियों के आदान-प्रदान के खेल" की आलोचना की और अधिकारियों को एकमुश्त समाधान के लिए पर्यावरण विभाग और ज़िला कलेक्टरों के साथ सीधे काम करने का निर्देश दिया।
  • घटिया गुणवत्ता पर ज़ीरो टॉलरेंस: चौहान ने घोषणा की कि निर्माण गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चेतावनी दी कि घटिया काम करती पाई गई किसी भी एजेंसी को परिणाम भुगतने होंगे।

स्थानीय भूगोल के अनुरूप ढलना

चौहान ने कहा कि भारत के विविध भूगोल को देखते हुए "सबके लिए एक जैसा" इंजीनियरिंग मॉडल कारगर नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी और बाढ़ व भूस्खलन जैसे मौसम संबंधी पैटर्न को ध्यान में रखने का आग्रह किया। उन्होंने चेताया कि अगर खराब जल निकासी के कारण पानी आसपास के ग्रामीणों के घरों में भर जाए, तो सड़क बोझ बन जाती है।

दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को याद करते हुए चौहान ने कहा कि PMGSY लगभग 8.50 लाख किलोमीटर सड़कों के निर्माण के ज़रिए पहले ही ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बदल चुकी है। आगे की ओर देखते हुए उन्होंने PMGSY-IV के तहत 62,000 किलोमीटर नई सड़कें बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का उल्लेख किया, जिनमें से 20,000 किलोमीटर को क्रियान्वयन के लिए पहले ही मंज़ूरी मिल चुकी है।

व्हाट्सऐप पर प्राइम न्यूज़ से जुड़ेंचैनल से जुड़ें →
Share:

Comments

Leave a comment