ट्रंप से बाइडन तक, औद्योगिक नीति अमेरिका में गहरे ढांचागत बदलाव का संकेत: जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगाह किया है कि अमेरिकी आर्थिक रणनीति में हाल के बदलाव केवल अस्थायी राजनीतिक मनमर्जी नहीं हैं, बल्कि ये अमेरिका के भीतर गहराई तक जमे ढांचागत बदलावों को दर्शाते हैं।
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार समर्थित औद्योगिक नीति की ओर बढ़ना—एक ऐसी अवधारणा जिससे अमेरिकी ऐतिहासिक रूप से असहज रहे हैं—अब वॉशिंगटन में दोनों दलों की साझा नीति बन गया है, जो ट्रंप प्रशासन से बाइडन प्रशासन तक के बदलाव के बाद भी कायम रहा।
एक स्थायी रणनीतिक पुनर्संरेखण
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि वैश्विक शक्तियों को केवल प्रशासनिक व्यवहार और बुनियादी व्यवस्थागत रुझानों के बीच फर्क करना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ नीतियां किसी खास नेता तक सीमित लगें, लेकिन वॉशिंगटन की मूल दिशा अधिक हस्तक्षेपकारी आर्थिक मॉडल की ओर बढ़ रही है।
"राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में जो कई नीतियां शुरू कीं, वे बाइडन के दौर में भी जारी रहीं," जयशंकर ने कहा। "अमेरिका की अपनी औद्योगिक नीति होने का विचार ही... दरअसल बाइडन के दौर में भी बना रहा।"
विदेश मंत्री की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वैश्विक समुदाय को व्हाइट हाउस में बदलाव से यथास्थिति बहाल होने का इंतजार करने के बजाय इन दीर्घकालिक रणनीतिक बदलावों के अनुरूप ढलना होगा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब
ये टिप्पणियां भारत-अमेरिका संबंधों के एक अहम मोड़ पर आई हैं, क्योंकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत उस दौर में पहुंच गई है जिसे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने "शॉर्ट स्ट्रोक्स" यानी प्रक्रिया का अंतिम चरण बताया।
ग्रीयर ने पुष्टि की कि हालांकि अंतिम घोषणा तुरंत नहीं होने जा रही, लेकिन मुख्य अड़चनों की पहचान हो चुकी है और दोनों देश उन्हें सुलझाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच "बेहद रचनात्मक बातचीत" का भी जिक्र किया और संकेत दिया कि प्रगति की समीक्षा के लिए दोनों नेता जल्द फिर बात कर सकते हैं।
व्यापार वार्ता के प्रमुख घटनाक्रम:
- उच्चस्तरीय बैठकें: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मिल्वॉकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से इतर USTR ग्रीयर के साथ सार्थक चर्चा की।
- सहयोग का दायरा: नेताओं के बीच हाल की चर्चाओं में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों जैसे अहम क्षेत्र शामिल रहे।
- अंतरिम समझौता: लक्ष्य अब भी पिछले संयुक्त बयानों के अनुरूप परस्पर लाभकारी अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है।
- बातचीत की बाधाएं: फरवरी में एक ढांचा तय हो गया था, लेकिन अमेरिकी टैरिफ परिदृश्य में बदलावों के कारण अंतिम समझौते की समयसीमा बढ़ गई है।
मंत्री गोयल ने X पर जानकारी साझा करते हुए अंतरिम समझौते के जल्द पूरा होने को लेकर उम्मीद जताई। दोनों देशों के अधिकारियों की बैठकें जारी रहने के बीच फोकस एक ऐसे संतुलित समझौते पर है जो नई दिल्ली और वॉशिंगटन दोनों की बदलती आर्थिक वास्तविकताओं को दर्शाए।